📿 नमाज़ के बाद

हिस्न-उल-मुस्लिम से

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أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ (ثلاثاً) اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
Astaghfirullāh ×3. Allāhumma antas-salāmu wa minkas-salām, tabārakta yā dhal-jalāli wal-ikrām
मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ (तीन बार)। ऐ अल्लाह! तू शांति है और तुझसे ही शांति है, बरकत वाला है तू ऐ महिमा और सम्मान वाले।
📖 Muslim 1/414
سُبْحَانَ اللَّهِ (٣٣) الْحَمْدُ لِلَّهِ (٣٣) اللَّهُ أَكْبَرُ (٣٣) لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ
Subḥānallāh ×33, al-ḥamdu lillāh ×33, Allāhu akbar ×33, then the tahlīl (100)
सुबहानल्लाह 33, अल्हम्दुलिल्लाह 33, अल्लाहु अकबर 33, फिर तहलील से सौ पूरे करें — पाप समुद्र के झाग जितने हों तो भी क्षमा।
📖 Muslim 1/418
اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ، وَشُكْرِكَ، وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ
Allāhumma aʿinnī ʿalā dhikrik, wa shukrik, wa ḥusni ʿibādatik
ऐ अल्लाह! अपने स्मरण, अपने आभार और अपनी अच्छी इबादत में मेरी सहायता कर।
📖 Abu Dawud 2/86