اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ، وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ، وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ
Allāhumma innī astakhīruka bi-ʿilmik, wa astaqdiruka bi-qudratik
ऐ अल्लाह! मैं तेरे ज्ञान से भलाई माँगता हूँ और तेरी शक्ति से सामर्थ्य चाहता हूँ, और तेरे महान अनुग्रह का सवाल करता हूँ, क्योंकि तू सक्षम है मैं नहीं, तू जानता है मैं नहीं, और तू ग़ैब का जानने वाला है (निर्णय के समय दो रकअत के बाद)।
📖 Al-Bukhari 7/162