بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا
Bismika Allāhumma amūtu wa aḥyā
ऐ अल्लाह! तेरे नाम के साथ मैं मरता और जीता हूँ।
📖 Al-Bukhari 11/113
اللَّهُمَّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَبْعَثُ عِبَادَكَ
Allāhumma qinī ʿadhābaka yawma tabʿathu ʿibādak
ऐ अल्लाह! मुझे अपने अज़ाब से बचा जिस दिन तू अपने बंदों को उठाएगा।
📖 Abu Dawud · At-Tirmidhi
سُبْحَانَ اللَّهِ (٣٣) الْحَمْدُ لِلَّهِ (٣٣) اللَّهُ أَكْبَرُ (٣٤)
Subḥān-Allāh ×33, Al-ḥamdu lillāh ×33, Allāhu akbar ×34
सोने से पहले सुबहानल्लाह 33 बार, अल्हम्दुलिल्लाह 33 बार और अल्लाहु अकबर 34 बार (सेवक से बेहतर)।
📖 Al-Bukhari & Muslim
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ غَضَبِهِ وَعِقَابِهِ، وَشَرِّ عِبَادِهِ، وَمِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ وَأَنْ يَحْضُرُونِ
Aʿūdhu bikalimātillāhit-tāmmāti min ghaḍabihi wa ʿiqābih
मैं अल्लाह के पूर्ण शब्दों की शरण लेता हूँ उसके क्रोध और दंड से, उसके बंदों की बुराई से, और शैतानों के बहकावे तथा उनकी उपस्थिति से।
📖 Abu Dawud 4/12